मैं इन्हें ही ढूंढती वापिस फिर आऊँगी

मैं  बहुत  दूर  से बड़े  सुरूर  से आई  हूँ  , कुछ  देर  ठहरूँगी  ज़रूर  कुछ  पुरानी  चीज़ों  को  निहारना  और  निखारना अभी बाकी  है  मेरे  उपर  के कमरे की  अलमारी  मैं रखी  मेरी  कुछ पुरानी  यादें  है  उन्हें  साथ  ले जाने नहीं  सहलाने आई  हूँ  कुछ  संजोई  हुई  पुरानी चीज़ो को  नज़र भर देखना अभी बाकी है  फिर  वह  कोने  मैं […]

शोर

हवा एक खिड़की से आती है और दूसरी से निकलमैंने खिड़की से चोरी-चोरी आने वाले कबूतर को भी उस दिन बाहर नहीं निकालासोचा थोड़ा तो शोर बहार भी होअंदर का शोर क्या पता इस तरह कुछ कम हो जाए

This uncontrollable need to weep once in a while is fine. Your desperate need to be understood by people around is also fine. What isn’t fine is being stuck in that emotion for more than needed. And to come out of the situation without learning anything from it. Learn to build yourself brick by brick. Learn to rely on just yourself for ultimate […]

Every few months when I hit rock bottom I try to re-evaluate all the extra baggage we carry to make our lives complicated and Unhappy. A long vacation is great or a meal outside is relaxing, but we can’t do it every single day. We have to find something meaningful to attain that zen-like feeling for most of our days […]

इक इक कर छूटे सब ही , कुछ और अंधेरे लगते हैं मैं तुझ में – तू मुझ में बस जा , फिर नये सवेरे लगते हैं रात का दिन से रिश्ता पुराना – रोज़ के फेरे लगते हैं दो पल अब तुम भी ठहरे  – यहां तो सालों ठहरे लगते हैं -Shally-

तीखा लगे पर मीठी सी सीख छोड़ जाते हो

तुम इतना खूब बोलो केसे लिख जाते हो तीखा लगे पर मीठी सी सीख छोड़ जाते हो लफ्ज़ो के तानो बानो से केसे खेल जाते हो अंजने ही सही पर दिल में कुछ टीस छोड़ जाते हो शब्दो के समुंदरों में केसे तेर जाते हो तैरते हो या फिर कुछ और डूब जाते हो हंस भी देते हैं और कभी […]

Raat

बस हुई आज की कुछ कल उठके फिर लड़ेंगे कुछ बुझ के फिर जलेंगे कुछ सपने फिर झिलमिलायेंगे और आँखों में टिमटिमायेंगे कुछ रौनक नई सी होगी और नया दिन अलग सा होगा अभी नींद का बसेरा है आकर मुझे गेरा है सब आंखों में रुका सा पड़ा है सच है कि सपना – धूमिल सा खड़ा है अभी रात […]

आज  मैं  हूँ  – कल  राख  – फिर धुँआ  हो  जाऊँगा हर  रोज़  हर  लम्हा  कुछ और  मरता जाऊँगा ज़िन्दग़ी  है  ज़िन्दग़ी  है  चार पल  की  सिर्फ इतनी तुम कहो  या  न कहो तुम  – मैं  तो  ढलता  जाऊँगा हाथ  से सुर्ख  रेत  जैसा  – मैं फिसलता  जाऊँगा आज  मैं  हूँ  – कल  राख  – फिर धुँआ  हो  जाऊँगा  -shally-

A deep untamed sea within me.

Sea was indifferent & moody. Initially, I felt it was angry, wild, and rough. Then I sat there for some time, admiring its waves. I closed my eyes and together we said some prayers as if celebrating a ritual. I knew no one could listen to us. Our giggles became laughter and I thanked him for blessing me with this […]

My Kashmir Files story part 3

In March this year, It had been a couple of days since I saw TKF in the theatre. I was feeling anxious and disturbed and barely slept for a couple of nights. One night I woke up at 3 am and vomited out our Jammu ordeal on paper for hours till I saw the early rays of the rising sun- […]